Love latters :- 1. जिंदगी तो ईश्वर ने ठीक ठाक दी है राधे...लेकिन इस भागदौड़, आपाधापी वाली जिंदगी से दूर कुछ क्षण तुम्हारे साथ गुजारने की लालसा है। मुझे तुम्हारा साथ चाहिए.....! मुझे अपनी गोद में सिर रखकर कुछ देर आराम कर लेने दो.... मैं तुमसे अपने हर जज़्बात कह लेना चाहता हूं....। तुम कुछ बोलते क्यों नहीं..? मुझे तुमसे प्यार है....और आखिरी सांस तक रहेगा। हम हमेशा के लिए एक हो जाएं इसके लिए मुझे तुम्हारी हां का इंतजार है। 2. आज मैं तुमसे जानना चाहता हूं कि तुमको मुझमें क्या अच्छा लगता है.....?? ये ही सवाल अगर तुम मुझसे पूछो, तो मैं कहूंगा कि.... मुझे पसंद हैं तुम्हारे बिखरे बाल जिनसे हवा अटखेलियां करती है....संवारने को जी चाहता है। तुम्हारे होंठ जैसे कमल की दो नाजुक सी पंखुड़ियां.....उस पर ऊपरी पंखुड़ी के ऊपर हल्का छोटा तिल तो जैसे हमारी जान ही ले लेता है। उस पर आपकी नशीली आवाज की मदहोशी...., भले ही ये आवाज दो बार नसीब हुई लेकिन तुम्हारे कुछ शब्द आज भी मेरे ज़हन में गूंजते हैं। वैसे कब कहां किसी की सारी ख्वाहिशें पूरी होती हैं जीवन में.....? अधूरी ख्वाहिशों के साथ शायद मैं भी च...
महत्वपूर्ण प्रश्न कक्षा-6 (Mid Term) Subject- हिंदी 1- नीले पंखों वाली चिड़िया क्या उड़ेलकर गाती है ? उत्तर : नीले पंखों वाली चिड़िया रस उँडेलकर गाती है। 2-'बचपन' पाठ के आधार पर हमारे बचपन की कुल्फी अब क्या हो गई है? उत्तर : लेखिका कहती है कि अब बचपन की रूचियाँ बदल चुकी हैं।अब कुल्फी की जगह आइसक्रीम ने ले ली है। 3- लेखिका को प्रत्येक शनिवार को क्या पीना पड़ता था ? उत्तर: हर शनिवार को लेखिका को ऑलिव ऑयल या कैस्टर ऑयल पीना पड़ता था। 4. लेखिका को चश्मा क्यों लगाना पड़ा? चश्मा लगाने पर उनके चचेरे भाई क्या कहकर चिढ़ाते थे? उत्तर: लेखिका को चश्मा इसलिए लगाना पड़ा क्योंकि रात में टेबल लैंप की रोशनी में काम करने से लेखिका की आँखों की रोशनी कमज़ोर हो गई थी। चश्मा लगाने पर उनके चचेरे भाई उन्हें ये कहकर चिढ़ाते थे कि- आँख पर चश्मा लगाया ताकि सूझे दूर की यह नहीं लड़की को मालूम सूरत बनी लंगूर की। 5. लेखिका अपने बचपन में कौन-कौन-सी चीजें मज़ा लेकर खाती थीं? उनमें से प्रमुख...
17 सितंबर 2024 आज आपके हाथों से बना घी मैने भी खाया, उसकी खुशबू से मन महक उठा। वैसे आपको इतना कष्ट करना नहीं चाहिए था। लेकिन ये अफसोस भी लगातार मुझे सालता रहा कि आप दरवाजे तक आए लेकिन घर नहीं आए। पता नहीं उस वक्त हम अभागे कहां थे...? वर्ना आपको हम ऐसे जाने ना देते। धन्य हो जाता ये घर और हम, अगर आपके चरण कमल यहां पड़ते! इस बहाने 10 _20 मिनट की यादगार गुफ्तगू भी होती....। खैर, इस कष्ट के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद। 21 सितंबर 2024 मेरी वजह से आप न कभी झुकोगे और न ही कभी गिराेगे! गिरने न देंगे किसी की नजरों में और न ही किसी के कदमों में। ये वादा है मेरा! न मैं कभी आपका हाथ छोड़ेंगे, बस शर्त इतनी है कि तुम अपना हाथ न छुड़ाना। अब यही हसरत है कि जितनी जिंदगी बची है आपके आसपास ही गुजर जाए। कभी आपसे आपकी शिकायत करूं, कभी दिल की बैचैनियां कहूं, कभी तुम्हारी तारीफ करूं....। कभी अपनी आंखों से निहारो तुम, कभी पलकों को झुका लो तुम। चलो कुछ फुर्सत के क्षण जी लेते हैं। 26 सितंबर 2024 किस किस बात का विरोध करूं? क्या इस बात का विरोध करूं कि तुम हर तीसरे दिन मुझे ब्लॉक क्यों कर देते हो,...
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